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इंटरनेट प्रसार और शासन

इंटरनेट शासन में महत्‍वपूर्ण इंटरनेट संसाधनों अन्‍य इंटरनेट प्रोटोकॉल संबंधी प्रौद्योगिकियों, अनुप्रयोगों, संसाधनो और सेवाओं के प्रबंधन से संबंधित सभी कार्यकलाप शामिल होते हैं। इसमें निजी क्षेत्र और सिविल समाज से उनकी संबंधित भूमिकाओं के बासरे में परामर्श/सहयोग से सरकार द्वारा साझा सिद्धांतों की नियामक और शासी नीतियां, शर्तें, नियम, निर्णय प्रक्रिया और कार्यक्रम तैयार करना शामिल हैं जो इंटरनेट के प्रादुर्भाव और इस्‍तेमाल का निर्धारण करते हैं।

इस क्षेत्र में डीईआईटीवाई द्वारा की गई कुछ उल्‍लेखनीय पहलों में निम्‍नलिखित शामिल हैं :

अगली पीढ़ी के नेटवर्क, अनुप्रयोग विकास, इंटरनेट का बहुभाषीकरण, सभी के लिए वैब अभिगम्‍यता, अवसंरचना की स्‍थापना, भारत की सार्वजनिक नीति से संबंधित चिंताओं के प्रतिनिधित्‍व आदि के क्षेत्र में अनुसंधान और विकास पहल।

1. आईआईटी बांबे, मुंबई द्वारा सर्वव्‍यापी ग्राहकोन्‍मुख ईथरनेट का इस्‍तेमाल करते हुए सागर्भित दक्ष विश्‍वसनीय इंटरनेट वर्किंग समाधान।

परियोजना के अंतर्गत अगली पीढ़ी की इंटरनेट डिजाइन के विकास, आप्टिकल नेटवर्किंग, कैरियर इथरनेट और उच्‍च गति संचार प्रणालियों की प्रौद्योगिकियों के परिनियोजन की परिकल्‍पना की गई है। परियोजना के पहले 12 माह में परियोजना दल ने इथरनेट स्विच के आदिरूप का विकास पहले ही कर लिया है, जिसे एमटीएनएल द्वारा अपने दो डेटा केंद्रों में स्‍थापित करने के लिए स्‍वीकार कर लिया गया है। विकसीत की गई प्रौद्योगिकी न केवल स्‍वदेशी है बल्कि भारत में इसका विकास पहली बार किया गया है।

2. स्‍वप्रबंधित नेटवर्क समाधान का विकासमापन और क्‍यूओएस के लिए नेटवर्क के क्षेत्र में अनुसंधान और विकास

एक अनुकूलित, स्‍व संरूपित नेटवर्क समाधान, जिसे ईडीजीई (इंटरप्राइज वाइड सेल्‍फ- मैनेज्‍ड नेटवर्क सॉल्‍यूशन) का नाम दिया गया है, जो टीसीपी/आईपी प्रोटोकॉल के साथ कार्य करता है और एलएएन, डब्‍ल्‍यूएएन, इंट्रानेट, एक्‍स्‍ट्रानेट और इंटरनेट नेटवर्कों में इस्‍तेमाल किया जाता है। एक आईडीएएस (इंट्रूजन डिटेक्‍शन सिस्‍टम) जिसे N@G नाम से जाना जाता है और ईडीजीई के साथ एकीकृत किया जाता है, का भी विकास किया गया है। परियोजना समापन की ओर बढ़ रही है।

3. आईपीवी4 से आईपीवी6 की ओर पलायन

डीईआईटीवाई आईपीवी6 को शीघ्र अपनाने की आवश्‍यकता पर कार्यशालाओं और सम्‍मेलनों, व्‍यवसायियों और नेटवर्क प्रचालकों को आईपीवी6 के परिनियोजन और मौजूदा आईपीवी4 नेटवर्क के साथ दोहरी व्‍यवस्‍था के लिए प्रशिक्षण हेतु सहायता प्रदान करता है, जिससे कि आईपीवी6 नेटवर्क तैयार किया जा सके और ऐसे ही सेवाओं और अनुप्रयोगों का विकास किया जा सके जिससे देश में आईपीवी6 की मांग बढ़ जाए।

4. अर्नेट और आईआईएससी बैंगलोर द्वारा मोबाइल आईपीवी6

इस परियोजना के अंतर्गत एक नेटवर्क से दूसरे नेटवर्क जैसे एलएएन से डब्‍ल्‍यूएएन आदि में सीमा रहित स्‍थानांतरण के लिए आईपीवी6 प्रोटोकॉल द्वारा स‍मर्थित मोबिलिटी के प्रदर्शन की परिकल्‍पना की गई है।

5. त्‍यागराज इंजीनियरिंग कॉलेज, मदुरई द्वारा स्रोत ई-वोटिंग प्रणाली के लिए सूचना न्‍यायिक विज्ञान फ्रेमवर्क का विकास

परियोजना के अंतर्गत इंटरनेट शासन प्रणाली की स्‍थापना, प्रचालन और मूल्‍यांकन के विभिन्‍न पहलुओं की जांच और ई-वोटिंग को सुकर बनाने के लिए प्रमाणीकरण, प्राधिकार प्रदान करने और अभिगम नियंत्रण हेतु एक नई पद्धति तैयार करने की परिकल्‍पना की गई है। ढांचा तैयार कर लिया गया है और कुछ नमूनों का प्रदर्शन किया गया है। कुछ अतिरिक्‍त वैधीकरण विशेषताएं और क्षेत्रीय परीक्षण प्रक्रियाधीन हैं।

6. ‘’कंसेप्‍ट एक्‍स्‍ट्रैक्‍शन कंटेक्‍सुअल डेटा रिट्रिवल’’ के लिए इंटेलीजेंट सर्च इंजन का विकाससीडैक बैंगलोर और आईआईआईटी बैंगलोर

परियेाजना के अंतर्गत एक ऐसे सुभिज्ञ ज्ञान आधार का विकास करने की परिकल्‍पना की गई है, जो अनुसंधानकर्ताओं, विज्ञप्तियों, अध्‍यापकों, अकार्मिक समितियों, अकार्मिक संस्‍थानों आदि सहित शैक्षणिक जगत के लिए सहायक होगा। प्रणाली के ढांचे का विकास और प्रदर्शन किया गया, सूचना सामग्री का सृजन और क्षेत्रीय परीक्षण जारी है।

7. अंतर्राष्‍ट्रीय डोमेन नामभारतीय भाषाओं के लिए कार्यान्‍वयन

भारत ने आईसीएएनएन की फास्‍ट ट्रैक प्रक्रिया के अंतर्गतआईसीएएनएन को 7 भारतीय भाषाओं और बोलियों अर्थात हिंदी (देवनागरी), बंगाली (बंगला), गुजराती(गुजराती), पंजाबी(गुरूमुखी), तमिल (‍तमिल), और तेलुगू (तेलुगू) में कंट्री कोड डोमेन नाम के लिए अपना अनुरोध भेजा है। आईडीएनसीसीटीएलडी (IDNccTLD) स्ट्रिंग ने स्ट्रिंग मूल्‍यांकन परीक्षण पास कर लिया है। इसका प्रकाशन कर दिया गया है और अब यह रूट जोन प्रत्‍यायोजन प्रक्रिया के अधीन है। डोमेन पंजीकरण प्रक्रिया के भाग-ख परीक्षण के लिए सभी प्रक्रियाएं और मूल्‍यांकन जारी हैं। राज्‍यों के साथ परामर्श से डोमेन नाम पंजीकरण के लिए डोमेन नाम पंजीकरण नीति का मसौदा तैयार कर लिया गया है और इसे डीईआईटीवाई तथा सीडैक की वेबसाईट पर प्रकाशित किया गया है।
अंतर्राष्ट्रीय डोमेन नाम [PDF]351.27 KB

8. सीडैक पुणे द्वारा पंजीयकों के लिए आईडीएन नीतियों (एबीएनएफ और भाषा तालिका) का विकास और कार्यान्‍वयन तथा आईडीएन को 22 सरकारी भाषाओं की दृष्टि से अनुकूल बनाना।

यह परियोजना पंजीयक/रजिस्‍ट्री तथा पंजीयनकर्ता और पंजीयक के लिए फ्रंट इंड जीयूआई द्वारा भारतीय भाषाओं में डोमेन नाम पंजीकरण के लिए सभी बैक एंड पंजीकरण टूलों का विकास और परीक्षण के लिए शुरू की गई है। आईडीएम फ्लोटिंग कीबोर्ड, भाषा लॉक अप टेबल, वैश्विक स्‍तर पर पुनरावृत्ति के बिना वैध डोमेन नामों के पंजीकरण हेतु सॉफ्टवेयर आदि का विकास इस परियोजना के अधीन किया जाएगा।

9. नेत्रहीन लोगों के लिए मुक्‍त स्रोत वैब ब्राउजर

एक्‍स्‍ट्रैक्‍शन इंजन; लाइनस प्‍लेटफॉर्म में पाठ को ब्रेल लिपी में ल्प्यिांतरण प्रणाली शामिल हैं। ब्रेल उपकरणों और मुक्‍त स्रोत अंग्रेजी टीटीएस इंजन के साथ वेब ब्राउजर के एकीकरण का कार्य जारी है।

10. नेशनल इंटरनेट एक्‍सचेंज ऑफ इंडिया (निक्‍सी) की स्‍थापना

अहमदाबाद (गुजरात), बैंगलुरू (कर्नाटक), हैदराबाद (आंध्र प्रदेश), मोहाली (चंडीगढ़) और लखनउ (उत्‍तर प्रदेश) में पांच अतिरिक्‍त इंटरनेट एक्‍सचेंज नोड प्रचालनरत किए गए हैं, जिससे कि चेन्‍नई, कोलकाता, मुंबई और नोएडा में निक्‍सी के मौजूदा हबों के साथ इन्‍हें जोड़ा जा सके। इंटरनेट एक्‍सचेंज नोड यह सुनिश्चित करने में सफल रहे हैं कि भारत में होने वाले इंटरनेट ट्रैफिक के साथ-साथ भारत जैसे स्‍थल में इंटरनेट ट्रैफिक देश के भीतर ही बना रहे, इस प्रकार ट्रैफिक की लेटेंसी में सुधार होगा, बैंडविड्थ लागत घटेगी और बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

11. .IN इंटरनेट डोमेन रजिस्‍ट्री की स्‍थापना

कंट्री कोड टॉप लेवल डोमेन (सीसीटीएलडी) नाम के लिए रजिस्‍ट्री.IN  का प्रबंधन नेशनल इंटरनेट एक्‍सचेंज ऑफ इंडिया (निक्‍सी) द्वारा किया जा रहा है। वर्तमान में 73 से अधिक पंजीयकों को विश्‍व भर में अपने उपभोक्‍ताओं को.IN डोमेन पंजीयन सुविधा उपलब्‍ध कराने के लिए अधिप्रमाणित किया गया है। इसके परिणामस्‍वरूप देश में  वैब होस्टिंग का प्रसार होगा और इंटरनेट में भारतीय भाषाओं में भी सूचना सामग्री उपलब्‍ध होगी। नवंबर 2010 तक 8 लाख .IN डोमेन नाम पंजीकृत किए जा चुके हैं। 5 मिनट के अधिकतम अपटाइम के साथ आपदा प्रबंधन के लिए दिल्‍ली और चेन्‍नई में 2 डेटा केंद्र स्‍थापित किए गए हैं।

12. जागरूकता कार्यक्रम

पंजीयकों, इंटरनेट सेवा प्रदाताओं, नेटवर्क सेवा प्रदाताओं, प्रौद्योगिकी विकासकर्ताओं, मानव मशीन अंतरापृष्‍ठ विकासकर्ताओं, प्रयोक्‍ताओं आदि के लिए निम्‍नलिखित मुद्दों पर कार्यशालाएं और प्रशिक्षण:

  • आईपीवी6 से संबंधित परिनियोजन और अनुप्रयोग उन्‍मुख परियोजनाएं।
  • .IN डोमेन नाम पंजीयन– पंजीयन की प्रक्रिया और नीतियां, विवाद समाधान नीति आदि।
  • भारतीय भाषाओं में डोमने - पंजीयन की प्रक्रिया और नीतियां, विवाद समाधान नीति आदि।
  • पहुंच, सुरक्षा और गोपनीयता, खुलेपन, विविधता, जटिल इंटरनेट संसाधन और उनके प्रबंधन संबंधी सिद्धांत, बच्‍चों का ऑनलाइन संरक्षण, क्षमता निर्माण, मुक्‍त मानक आदि से संबंधित मुद्दों का इंटरनेट शासन।

13. डीईआईटीवाई, नई दिल्‍ली में आईसीएएनएन सरकारी सलाहकार समिति (जीएसी) सचिवालय

सहायक नाम और नंबरों के लिए इंटरनेट सहयोग (आईसीएएनएन) के सरकारी सलाहकार समिति (जीएसी) सचिवालय की स्‍थापना इलेक्‍ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग में की गई है।  जीएसी एक सलाहकार समिति है, जिसमें राष्‍ट्रीय सरकारों, बहुराष्‍ट्रीय सरकारी संगठनों और संधि में शामिल संगठनों तथा अलग-अलग अर्थव्‍यवस्‍थाओं के प्रतिनिधिी शामिल हैं। यह मानकीकरण, प्रोटोकॉल और प्रौद्योगिकी तथा देश के लोगों के सामाजिक और आर्थिक जीवन को प्रभावित करने के लिए इंटरनेट से संबंधित सार्वजनिक नीतिगत मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक महत्‍वपूर्ण फोरम है। 

14. इंटरनेट शासन फोरम (आईजीएफ)

भारत संयुक्‍त राष्‍ट्र के इंटरनेट शासन फोरम के बहु पणधारक सलाहकार समूह का एक सदस्‍य है। इंटरनेट पर सार्वजनिक नीति के मुद्दों से संबंधित भारत की चिंताओं और इसकी शिकायत को नियमित भागीदारी, कार्यशालाएं आयोजित कर और गतिशील परिचर्चा बैठकों तथा बहुपक्षीय और द्विपक्षीय बैठकों में उपयुक्‍त ढंग से उठाया जाता है।

शुरू किए गए नए अनुसंधान और विकास प्रस्‍ताव

15. लाइट ट्रायल और वेरी फास्‍ट स्विचिंग का इस्‍तेमाल करते हुए आभासी क्‍लाउड कंप्‍युटिंग अवसंरचना

परियोजना के अंतर्गत क्‍लाउड कंप्‍युटिंग आवश्‍यकताओं के लिए अधिसूचित स्‍टैंड-एलोन, इंड-टू-इंड सर्विस को पूरा करने के लिए भौतिक और डेटा सतह पर नवोद्भव के एकीकरण और परिनियेाजन के परिकल्‍पना की गई है। लाईट-ट्रायल और सर्वव्‍यापी इथरनेट जैसी दो प्रौद्योगिकियों को एकीकृत करने का प्रस्‍ताव है। लाईट-ट्रायल प्रौद्योगिकी प्‍लेटफॉर्म ऑप्टिकल लेयर मल्‍टीकास्टिंग, गतिशील बैंडविड्थ, निम्‍न लागत पर सब वैब लेंथ, ग्रैनुलर सपोर्ट  प्रदान कर सकता है। इसके फलस्‍वरूप यह क्‍लाउड आवश्‍यकताओं के लिए एक आदर्श ट्रांसपोर्ट लेयर प्रौद्योगिकी हो सकती है।

16. ग्‍लोबल इंटरनेट गवर्नेंस एंड एडवोकेसी (जीआईजीए)

परियोजना के अंतर्गत कानूनी प्रणालियों और लिखतों तथा कानून की हर शाखा अर्थात नागरिक, दांडिक, घटनाजन्‍य, राजकोषीय और अंतर्राष्‍ट्रीय के क्षेत्र में इंटरनेट प्रौद्योगिकी के साथ इसके अंतरापृष्‍ठ के बारे में आधारभूत और अनुप्रयुक्‍त अनुसंधान शुरू करने तथा संचालित करने और  कार्यपालिका/न्‍यायपालिका/विधायिका/शिक्षा जगत/उद्योग जगत में नीति निर्माताओं के बीच इसका प्रचार प्रसार करने की परिकल्‍पना की गई है।

17. वास्‍तविक नेटवर्कों में सर्वव्‍यापी इथरनेट आधारित डेटा केंद्रों का परिनियोजन- परियोजना के कार्य क्षेत्र का वैधीकरण

परियोजना के अंतर्गत डीईआईटीवाई द्वारा वित्‍त पोषित परियोजना –पेरिस्‍कोप (प्रैगमैटिक, एफिसिएंट, रिलाएबल, इंटरनेटवर्किंग सॉल्‍यूशन यूजिंग कंज्‍यूमर सेंट्रिक ओमनीप्रेजेंट इथरनेट) के अंतर्गत विकसित सर्वव्‍यापी इथरनेट स्विच के परिनियोजन द्वारा एक वास्‍तविक नेटवर्क में इसके वैधीकरण की परिकल्‍पना की गई है। एमटीएनलएल मुंबई ने अपने मुंबई स्थित डेटा केंद्रों में इन दो स्विचों के परिनियोजन हेतु सहमति व्‍यक्‍त की है।

18. भारत में ब्रॉडबैंड का प्रभाव- मूल्‍यांकन रिपोर्ट

परियोजना के अंतर्गत देश की अर्थव्‍यवस्‍था, विशेष रूप से सकल घरेलू उत्‍पाद (जीडीपी) वृद्धि, शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य, ग्रामीण वाणिज्‍य और सरकारी सेवाओं सहित सामाजिक सशक्तिकरण में ब्रॉडबैंड/इंटरनेट के प्रभाव का अध्‍ययन करने और राज्‍यों तथा संघ राज्‍यों से नमूनों पर आधारित ‘’क्‍या कार्य कर रहा है’’ और '' क्‍या कार्य नहीं कर रहा है’’ पर मामला अध्‍ययन करने का प्रस्‍ताव किया गया है।

19..IN अंतर्राष्ट्रीय डोमेन नाम नीतिगत ढांचा और कार्यान्वयन [PDF]545.1 KB

संपर्क व्यतक्ति :

वैज्ञानिक जी
सूचना प्रौद्योगिकी विभाग
संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय
इलेक्‍ट्रॉनिक निकेतन, 6 सीजीओ कॉम्‍प्‍लेक्‍स, नई दिल्‍ली – 110003
दूरभाष: +91-11-24365434
ई-मेल: drgovind[at]nic[dot]in