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भारत सरकार Ministry of Electronics & Information Technology
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आईसीडी के उद्देश्‍य और क्रियाकलाप

इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग (डीईआईटीवाई( के अंतर्राष्ट्रीय समन्‍वय प्रभाग (आईसीडी( द्विपक्षीय, बहुपक्षीय या क्षेत्रीय ढांचे के तहत इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी के उभरते और अग्रणी क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए स्थापित किया गया है। यह एक मान्यता प्राप्त तथ्य है कि सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) समाज के स्‍थयी सामाजिक आर्थि‍क बदलाव को बढ़ाने में सहायक हो सकती है । वैश्विक स्‍तर पर कम सुविधा प्राप्‍त समाजों तक पहुँचने के लिए आईसीटी के लाभ के लिए डिजिटल डिवाइड को दूर करने की भी आवश्‍यकता है। भारत डिजिटल डिवाइड को दूर करने में अपने व्यापक अनुभव के साथ भारत में भी आईटी बुनियादी सुविधाओं, नेटवर्किंग, क्षमता निर्माण, मानव संसाधन विकास और ई-शासन के क्षेत्र में तकनीकी सहायता प्रदान कर कई उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं को सुविधा प्रदान कर रहा है। इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी के उभरते और अग्रणी क्षेत्रों में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने , निवेश को बढ़ावा देने के तरीके और नियामक तंत्र का समाधान करने के तरीके तलाशने के लिए विभिन्न सामूहिक प्रयास किए गए हैं जिससे कि स्‍थायी विकास को बढ़ावा दिया जा सके और और अन्य देशों के साथ रणनीतिक भागीदारी को मजबूत किया जा सके।

सरकार निम्‍नलिखित उद्देश्यों के साथ सुविधा प्रदाता, प्रमोटर और प्रेरक के रूप में कार्य करती है:

  • अन्य देशों के उद्योगों के साथ सहयोग करने के लिए अपने उद्योगों की सहायता के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग हेतु अनुकूल माहौल पैदा करना;
  • इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित सुविधाओं को लागू करने में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना, प्रोत्साहित करना और संवर्धन करना;
  • अंतरराष्ट्रीय निकायों / संस्‍थानों जैसे डब्‍ल्‍सयूएसआईएस, विश्व बैंक, विश्व व्यापार संगठन के साथ भारत के हितों की रक्षा करने के लिए तकनीकी और नीतिगत मुद्दों का समन्वय;
  • संयुक्त परियोजनाएं शुरू करना जैसे आईटी संस्‍थान, सॉफ्टवेयर पार्क, संयुक्‍त अनुसंधान विकास के लिए कार्यक्रम, इलेक्ट्रॉनिकी / आईटी सलाहकारों आदि को सुविधाजनक बनाना ;
  • व्यापार मेलों, संगो‍ष्ठियों और प्रदर्शनियों में भाग लेकर दुनिया भर में भारत की सूचना, संचार प्रौद्योगिकी सामर्थ्‍य का प्रदर्शन। 

अंतर्राष्‍ट्रीय समन्‍वय रणनीति:

  • ज्ञान साझा करने, बाजार पहुंच एवं विविधीकरण के लिए विभिन्न विकसित और विकासशील देशों, बहुपक्षीय संगठनों के साथ सहभागिता;
  • आईटी-आईटीईएस निर्यात को बढ़ावा देने के लिए संभावित भागीदारों के साथ सहभागिता;
  • ज्ञान साझा करने (उभरती प्रौद्योगिकियों) के लिए विकसित देशों के साथ सहभागिता;
  • संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए आईसीटीडी में उनकी सहायता के लिए विकासशील देशों के साथ सहभागिता;
  • विदेशों में बहुत सी परियोजनाएं शुरू करना और उनका कार्यान्‍वयन ;
  • वैश्विक स्‍तर पर आईटी-आईटीईएस के क्षेत्र में अग्रणी स्‍थल के रूप में अपनी शक्ति प्रदर्शित करने के लिए परियेाजनाएं कार्यान्वित करना;
  • अनुसंधान और नवोद्भव तथा विभिन्‍न चुनौतियों का समाधान करने के लिए अंतर्राष्‍ट्रीय सहयोग बढ़ाना ;
  • ई-शासन, भाषा प्रौद्योगिकी, इंटरनेट शासन आदि जैसे क्षेत्रों में क्षमता निर्माण, मानव संसाधन विकास और विशेषज्ञता साझा करना।

कार्यकलाप :

विभाग कर्इ देशों के साथ सरकार से सरकार के बीच सक्रिय सहयोग स्‍थापित करता है। बहुत से देशों के साथ द्विपक्षीय व्‍यवस्‍थाओं को अंतिम रूप दिया गया है। इन व्‍यवस्‍थाओं के तहत कई समझौता ज्ञापन, करार और संयुक्‍त कार्यकारी समूह गठित किए गए हैं, जिससे कि साझा हितों, प्राथमिकताओं, नीतिगत द्विपक्षीय वार्ता और आईसीटी के क्षेत्र में सहयोग के लिए आवश्‍यक टूल तैयार किए जा सकें।

समझौता ज्ञापनों में यथा परिकल्पित सहयोग के क्षेत्रों में मुख्‍य रूप से आईटी सॉफ्टवेयर के विकास को बढ़ावा देना शामिल है, जिसमें दूरसंचार सॉफ्टवेयर, आईटी समर्थ सेवाएं, ई-वाणिज्‍य सेवाएं और सूचना सुरक्षा, इलेक्‍ट्रॉनिक शासन, आईटी और इलेक्‍ट्रॉनिकी हार्डवेयर, आईटी शिक्षा और आईटी समर्थ शिक्षा के लिए मानव संसाधन विकास, अनुसंधान एवं विकास, तीसरे देश के बाजारों आदि की तलाश शामिल हैं।

  • समझौता ज्ञापन (एमओयू) के अंतर्गत सहयोग बढ़ाने के लिए दो अथवा अधिक देशों/क्षेत्रीय समूहों के बीच द्विपक्षीय अथवा बहुपक्षीय करार किए जाते हैं। समझौता ज्ञापन में एक साझा कार्रवाई का उल्‍लेख करते हुए देशों के बीच एक समाहार व्‍य‍क्‍त किया जाता है। आईसीटी और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में बहुत से समझौता ज्ञापन पहले ही किए जा चुके हैं। डीईआईटीवाई ने आईसीटी/साईबर सुरक्षा/सीसीए/एनआईसीएआई के क्षेत्र में 28 सक्रिय समझौता ज्ञापन/करार/अभिरूचि की संयुक्‍त घोषणाएं की हैं। आईसीटी के क्षेत्र में सभी समझौता ज्ञापन/करार/अभिरूचि की संयुक्‍त घोषणाओं की निगरानी और कार्यान्‍वयन नियमित रूप से संयुक्‍त कार्य समूहों (जेडबल्‍यूजी)/जीसी द्वारा की जाती है।
  • संयुक्‍त कार्य समूह (जेडब्‍ल्‍यूजी) की बैठकों में संबंधित पक्षों की ओर से सरकार से सरकार और उद्योग से उद्योग भागीदारी को बढ़ावा दिया गया है। इन कार्य समूहों की बैठकों में आईसीटी नीतियों और रणनीतियों, साइबर सुरक्षा, टेक्‍नो पार्क, वैश्विक स्‍तर पर कार्यबल का संचलन, मुक्‍त खुला स्रोत सॉफ्टवेयर, क्‍लाउड कंप्‍यूटिंग, आरएफआईडी इंबैडेड सिस्‍टम, न्‍यू जेनरेशन नेटवर्क, स्‍मार्ट कार्ड, ई-शासन आदि के क्षेत्र में सहयोगात्‍मक अनुसंधान और सतत आधार पर सूचना के आदान-प्रदान तथा सहयोगात्‍मक पहल के लिए दूरसंचार और मीडिया से जुड़े मुद्दों पर विस्‍तृत चर्चा की जाती है।
  • अनुसंधान और विकास( आर एंड डी) को बढ़ावा ऐसे कार्यकलाप हैं, जिनके लिए तकनीकी और समस्‍या निवारण सेवाएं प्रदान करने, विभिन्‍न समायोजन उपस्‍करों के नियंत्रण और उत्‍पादन की लागत घटाने तथा उत्‍पादों की गुणवत्‍ता में सुधार कराने के लिए उत्‍पादों की गुणवत्‍ता बनाए रखने तथा गुणवत्‍ता नियंत्रण तथा नियमित प्रणाली अपनायी जाती है।
  • औद्योगिक संवर्धन को किन्‍हीं भी दो देशों (अथवा क्षेत्रों) में आधारित कंपनियों द्वारा एक दूसरे के क्षेत्र में निवेश के पारस्‍परिक प्रोत्‍साहन, संवर्धन और रक्षा के लिए उन दोनों देशों (अथवा क्षेत्रों) के बीच एक करार के रूप में परिभाषित किया जाता है। इन करारों का उद्देश्‍य ऐसी स्थितियां निर्मित करना है, जो एक क्षेत्र अथवा देश के निवेशकों द्वारा दूसरे क्षेत्र अथवा देश में निवेश को सुकर बनाने के लिए अनुकूल हैं। ऐसे करार दोनों देशों के लिए लाभप्रद होते हैं क्‍योंकि वे उनके व्‍यापारिक प्रयासों में तेजी लाते हैं और इस प्रकार उनकी संपन्‍नता में वृद्धि करते हैं।
  • अंतर्राष्‍ट्रीय परियोजनाएं इलेक्‍ट्रॉनिकी और आईटी क्षेत्र में उभरते हुए बाजारों के लिए नए उत्‍पाद विकसित करने के प्रयोजन से शुरू और कार्यान्वित की जा रही हैं। आईसीटी का उद्देश्‍य विभिन्‍न विकासशील देशों में उत्‍कृष्‍टता केंद्र सृजित कर अंतर्राष्‍ट्रीय प्रशिक्षण संकल्‍पना तैयार करना भी है।

आईसीडी की उपलब्धियां:

  • अंतर्राष्‍ट्रीय समन्‍वय के जरिए भारत की आईटी ब्रांड छवि और राष्‍ट्रीय स्‍तर पर प्रतिस्‍पर्धा बढ़ाई गई;
  • सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में देश की विशिष्‍ट जरूरतों की पहचान के लिए व्‍यवहार्यता अध्‍ययन किया गया और भारत के साथ सहयोग के विभिन्‍न क्षेत्रों की पहचान की गई;
  • आज की तारीख तक अन्‍य देशों के साथ आईसीटी के क्षेत्र में 68 समझौता ज्ञापन/करार /संयुक्‍त घोषणाओं को पूरा किया गया;
  • संयुक्‍त कार्य समूहों, संयुक्‍त आयोगों, अंतर-सरकारी समितियों आदि जैसी कार्यान्‍वयन व्‍यवस्‍थाओं के जरिए 24 विभिन्‍न देशों के साथ 28 समझौता ज्ञापनों/करारों/संयुक्‍त घोषणाओं को सक्रिय रखा गया;
  • आईसीटी नीतियों और रणनीतियों पर सरकार से सरकार और उद्योग से उद्योग के बीच विचार-विमर्श, सूचना के लगातार आदान-प्रदान और सहयोगात्‍मक पहल के लिए अनुसंधान सहयोग बढ़ाया गया;
  • विदेश मंत्रालय द्वारा वित्‍तीय सहायता प्राप्‍त संयुक्‍त परियोजनाओं जैसे आईटी केंद्र, सॉफ्टवेयर पार्क, संयुक्‍त अनुसंधान और नवोद्भव के लिए कार्यक्रम तथा द्विपक्षीय सहयोग के अंतर्गत आईटी परामर्श आदि को सुकर बनाने में तकनीकी सहयोग प्रदान किया;
  • विभिन्‍न तकनीकी रिपोर्ट, रणनीतिक दस्‍तावेज आदि तैयार किए और उनका मूल्‍यांकन किया;
  • यूएसए, ईयू, कोरिया, इजरायल, नीदरलैंड, डब्‍ल्‍यूआईपीओ और ईपीओ के साथ अनुसंधान एवं विकास, नवोद्भव के लिए सहयोग।