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भारत सरकार Ministry of Electronics & Information Technology
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दिशानिर्देश

1.0 पृष्ठभूमि

अपनी स्थापना काल से ही इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग देश में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी एवं संबंधित क्षेत्रों में अनुसंधान और विकास के प्रयासों को बढ़ावा दिया है। तदनुसार डीईआईटीवाई अनुसंधान एवं विकास से संबंधित परियोजनाओं/योजनाओं को लेने के लिए शिक्षण संस्थाओं एवं अनुसंधान एवं विकास संगठनों को सहायतार्थ अनुदान के रूप में वित्तीय समर्थन प्रदान करता है तथा साथ हीसूचना संचार प्रौद्योगिकी एवं संबंधित क्षेत्रों के साथ सामाजिक-आर्थिक एवं व्यावसायिक क्षेत्रों में उनके प्रयोग के लिए संगठनों/व्यवसैयिक निकायों द्वारा सम्मेलन/कार्यशाला/गोष्ठी/संगोष्ठी आयोजित करने के लिए वित्तीय समर्थन प्रदान करता है। भौगोलिक दृष्टिकोण से पूरे देश में फैले हुए शिक्षण संस्थाओं, उद्योगों तथा अनुसंधान प्रयोगशालाओं को डीईआईटीवाई का सहायतार्थ अनुदान का लाभ उठाते हैं। आईसीटी के उभरते हुए क्षेत्रों में कार्यशाला/सम्मेलन/संगोष्ठी आदि आयोजित करने के लिए

2.0 उद्देश्य एवं लक्ष्य

सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी एक गहन सूचना एवं ज्ञान आधारित प्रौद्योगिक क्षेत्र है। इसका मुख्य उद्देश्य है सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी तथा संबंधित क्षेत्रों में पूरे देश में प्रौद्योगिकी संभावनाओं से संबंधित सभी तत्वों को सम्मेलन समर्थन कार्यक्रमों के माध्यम से जोड़ दिया जाए।

यह विचारणीय है कि राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गोष्ठियां/संगोष्ठिया/कार्यशालाएं के समर्थन से निम्नलिखित के लिए सेवा प्रदान की जा सकती हैः

  • प्रौद्योगिकी प्रवृत्ति तथा विकास एवं इलेक्ट्रॉनिकी और आईसीटी क्षेत्रों की उन्नति जैसे विकास, प्रतियोगितात्मकता, उत्पदकता, गुणवत्ता, अनुसंधान एवं विकास के प्रयोग से संबंधित उनके विभिन्न पहलुओं तथा उनका विश्लेषण करने के लिए उद्योग/शिक्षण संस्थानों/अनुसंधान एवं विकास तथा अन्य समुदाय से विशेषज्ञों को एक मंच पर लाया जाए; तथा
  • घरेलू तथा अंतर्राष्ट्रीय बाजार तथा इलेक्ट्रॉनिकी, संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र मे निर्यात को बढावा देने के लिए मानव संसाधन विकास करना।
  • प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में जो खालीपन है,जानकारी आयात की जरूरत,उत्पादकता को बढ़ावा देना ताकि प्रतियोगिता को मजबूती मिले, उद्योग को भविष्य की जरूरत  पूरा करना तथा उचित जनशक्ति की पहचान करना तथा आवश्यक जनशक्ति का पूरा करने के लिए कार्ययोजना तैयार करने केलिए बुद्धिजीवीयों का सत्र बुलाना।
  • प्रमुख क्षेत्रों की पहचान करना तथा भारत में पहचान की गई प्रमुख क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी क्षमताओं का विकास करना ताकि वैश्विक प्रतियोगिता सहित सुविधाओं की पहचान, राष्ट्रीय आधार पर अनुसंधानकर्ताओं की जरूरत तथा वित्तीय कौशलकी पहचान करना।
  • इलेक्ट्रॉनिकी तथा आईसीटी के विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों जैसे उद्योगों, स्वास्थ्य-देखभाल, शिक्षा, कृषि, परिवहन, शक्ति सहित सामाजिक विकास क्षेत्र की पहचान करना तथा उचित प्रयोग को बढ़ावा देना।
  • निधियों का बड़े पैमाने पर वितरण। देश के दूर-दराज क्षेत्रो तथा ग्रामीण क्षेत्रों से आए प्रस्तावों को वरियता दी जाएगीजहां उद्योग के प्रायोजन की संभावना कम है।

इसका आशय है एक दूसरे का पूरक/संपूर्ण प्रयास से कुल मिलाकर राष्ट्रीय जरूरतों को पूरा करना ताकि भारत एक वैश्विक अनुसंधान एवं विकास तथा सेवा केन्द्र बन सके। इस लक्ष्य को पूरा करने की दृष्टि से इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग वित्तीय एवं तकनीकी समर्थन देगा तथा सम्मेलनों/गोष्ठियों/संगोष्ठियों/कार्य़शाला स्कूलों (अल्पकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रम जो कि 5 दिनो से ज्यादा दिन के लिए नहीं होगा) के आयोजन के लिए वित्तीय समर्थन अथवा बिना समर्थन के प्रायोजन करेगा।

3.0 सामान्य पात्रता मापदंड तथा जीआईए समर्थन के संचालन के लिए दिशानिर्देश

3.1 इस योजना के अंतर्गत  क्षेत्रीय, राष्ट्रीय अथवा अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान एवं विकास संस्थानों, आईआईटी, एनआईटी, केन्द्रीय/राज्य सरकार के विश्वविद्यालयों, आईआईआईटी, वैज्ञानिक सोसायटियों/सरकारी विभाग के निकायों, पंजीकृतव्यवसायिक निकायों तथा आईसीटी क्षेत्र से संबंधित उद्योग संघों तथा सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के अंतर्गत पंजीकृत अनुसंधान एवं विकास संगठनों तथा एनजीओस्तर पर सम्मेलनों/गोष्ठियों/कार्यशालाओं/संगोष्ठियों के आयोजन के लिए सहायतार्थ अनुदान प्राप्त करने के लिए पात्र हैं।

3.2 संगठनों को तकनीकी एवं वित्तीय ट्रैक रिकार्ड होनी चाहिए जिसकी पुष्टि वार्षिक रिपोर्ट/तुलन-पत्र/वित्तीय विवरणियों से हो सके।

3.3 कार्यक्रम का विषय/लक्ष्य इलेक्ट्रॉनिकी, संचार, आईटी तथा संबंधित क्षेत्रों के स्थायीत्व के अनुरूप होनी चाहिए(प्रमुख क्षेत्रों की विस्तृत सूची परिशिष्ट-I में दी गई है। प्रस्ताव के मूल्यांकन वर्तमान संबंधित विषय भी  हो सकता है। फिर भी, केवल आईटी का नाम लेकर कार्यक्रम के समर्थन के लिए बढ़ावा नहीं दिया जा सकता है।

क्रम सं.

कार्यक्रम की श्रेणी

अधिकतम सहायतार्थ समर्थन

विस्तृत स्तर पर वित्तीय समर्थन निम्नलिखित आधार पर होगा

1

क्षेत्रीय स्तर – पड़ोसी राज्यों/संघ शासित क्षेत्र के विशेषज्ञ द्वारा सामान्य रूप से कार्यक्रम में भाग लेने पर

1.50 लाख रु0

2

राष्ट्रीय स्तर – देश के विभिन्न राज्यों/संघ शासित क्षेत्रों तथा राष्ट्रीय स्तर के संगठनों/संस्थाओं के प्रसिद्ध विशेषज्ञों द्वारा कार्यक्रम में भाग लेने पर

2.00 लाख रु0

 

3

संगठनों द्वारा अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम पर

3.00 लाख रु0

नोटः अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम होने पर सामान्य कार्यक्रम होने पर पुष्टि की जाए कि यह अंतर्राष्ट्रीय स्तर के सहयोग (वित्तीय समर्थन के साथ अथवा बिना वित्तीय समर्थन के) से है।

  • सम्मेलन से पूर्व छपाई के लिए (घोषणा, उद्धरण आदि)
  • कर्यवाहियों का प्रकाशन

3.4 संगठन को डीईआईटीवाई के 5 तकनीकी अधिकारियों सहित संबंधित विभाग के एक अधिकारी को पूर्ण प्रतिभागी के रुप बिना किसी शुल्क के पंजीकरण करना होगा।

3.5 उपर्युक्त पैरा 3.1 से 3.4 में निर्देशित दिशानिर्देश के संतोषजनक पूरा करने पर वित्तीय समर्थन दिया जाएगा। अगर किए गए वायदे न पूरा करने पर प्राप्त सहायतार्थ अनुदान डीईआईटीवाई को ब्याज सहित वापस करना होगा। किसी भी समय कार्यक्रम के बारे में नकारात्मक रिपोर्ट आयोजनकर्ता के विरूद्ध होगा।

3.6 गारंटी संगठन जीएफआर 19-ए के आधार पर उपयोगिता प्रमाणपत्र देना होगा तथा कार्यक्रम पूरा होने के 30 दिन के अंदर सहायतार्थ अनुदान से संबंधित डीईआईटीवाई को संपरीक्षित लेखा विवरणी जमा करना होगा।

3.7 गारंटी संस्थान सुनिश्चित करें कि कार्यक्रम पूरा होने पर 30 दिन के अंदर निम्नलिखित दस्तावेज डीईआईटीवाई को प्रस्तुत करना होगाः

  • उपयोग प्रमाणपत्र तथा लेखाओं की संपरीक्षित विवरणी।
  • कार्यवाहियों की तीन प्रतियां तथा पीडीएफ फॉर्मेट में सॉफ्ट कॉपी तथा भागीदारों की सूची।
  • प्रस्तुतीकरण की संक्षिप्त विवरणी अथवा चर्चा की गई विषयों तथा कार्य़क्रम की प्रमुख सिफारिशों की हार्ड कॉपी तथा सॉफ्ट कॉपी जमा करना होगा।

3.8 अगर गारंटी संगठन डीईआईटीवाई को जरूरी दस्तावेज जमा नही कराये तो यह मान लिया जाएगा कि ऐसे संस्थानों/संगठनों को डीईआईटीवाई द्वारा वित्तीय सहायता देने के बारे में पुनः गौर किया जाएगा।

3.9 लेखा-परीक्षा प्राधिकारी के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगीकी विभाग अधिकृत है कि वे ऐसे विवरणी या दस्तावेज मंगवाये जो जरुरी समझता है ताकि जिस कार्य के लिए दिए गए ग्रांट का इस्तेमाल नियमानुसार सही तरीके से हुआ है तथा गारंटी संगठन की जिम्मेबारी है कि लेखा-परीक्षा प्राधिकरण एवं इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग को वे सभी सूचना तथा दस्तावेज प्रस्तुत करें जो उनसे समय-समय पर मांगाजा जाता है।

3.10 ग्रांट पाने वाले संस्था को लागू सरकारी अनुदेश के अनुसार अनुदान प्राप्त राशि की निर्धारित एक प्रतिभूति बॉण्ड देना होगा। उन्हे जीफआर में दिए गए अन्य अनुदेशों तथा संलग्न शर्तों को मानना होगा।

3.11 ज्यादा-से-ज्यादा भागीदार संस्थाओं को सहायतार्थ अनुदान का लाभ मिल सके, इसलिए किसी भी संगठन/संस्था को वर्ष में एक बार कार्यक्रम आयोजित करने के लिए ग्रांट दिया जाएगा। वर्ष अप्रैल से मार्च गीना जाएगा।

3.12 इस योजना के अंतर्गत कार्योत्तर मंजूरी नहीं दी जाएगी।

3.13 किसी भी स्थिति में कार्यक्रम प्रबंधक को निधि जारी नहीं की जाएगी।

3.14 ग्रंट प्राप्त करने के लिए डीईआईटीवाई को आवेदन 3 महीने पहले जमा करना होगा। बाद में प्राप्त प्रस्तावों पर विचार नहीं किया जाएगा।

3.15 सभी अनुरोध परिशिष्ट-II में दिए अनुसार निर्धारित प्रोफार्मा में प्रस्तुत करना होगा तथा इसे वरिष्ठ निदेशक, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, व्यापार एवं निवेश संवर्धन प्रभाग, इलेक्ट्रॉनिक्स निकेतन, 6 सीजीओ कॉम्पलेक्स, नई दिल्ली-110003 को प्रस्तुत करना होगा।