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सामान्य

करें-

  • याद रखें विभागीय जांच में आवश्यक सबूत आपराधिक मामले में आवश्यक सबूत से अलग है। सुप्रीम कोर्ट की अनुशासनात्मक जांच में आवश्यक सबूत संदेह से परे होनें चाहिए।

न करें-

  • जब पदोन्नति के लिए कर्मचारी को सतर्कता निकासी आरोप पत्र जारी किया गया हो तो इसे न रोकें।
  • आरोप पत्र के प्रेषण का मतलब यह नहीं है की इसे आरोपी अधिकारी (सीओ) को दे दिया जाय। बल्कि आरोप पत्र के प्रेषण का मतलब 'इशु करना' होगा।

करें-

  • स्थायी आदेश/ सीडीए नियम के प्रावधान से संबंधित संदेह को दूर करने के लिए निर्दिष्ट सक्षम प्राधिकारी से अनुमोदन लें।
  • आरोपी अधिकारी (सीओ) एक कार्यकारी अधिकारी होता है और अगर वह अपने ऊपर किसी भी मामलें के खिलाफ अपील करना चाहता है, तो उसे सीडीए नियमों के अनुसार आदेश पारित होने की तिथि से एक माह के भीतर करना चाहिए।
  • आरोपी अधिकारी (सीओ) के क्लेश को खत्म करने के लिए अनुशासनात्मक मामलों से तेजी से निपटें।
  • मामले में निर्णय लेने के लिए अनुशासनिक प्राधिकारी (डीए) को जांच रिपोर्ट भेजनें से पहले आरोपी अधिकारी (सीओ) को रिपोर्ट की एक प्रति भेजें।
  • प्रासंगिक दस्तावेजों को सुनिश्चित करने के क्रम में मसौदा तैयार करें और मुख्य सतर्कता अधिकारी के साथ आरोप पत्र का पुनरीक्षण करें।

न करें-

  • अनुशासनात्मक कार्रवाई सक्षम न्यायालय या अनुशासनिक प्राधिकारी के लिखित आदेश को छोड़कर किसी औऱ के आदेश पर नहीं रोकी जानी चाहिए।
  • आरोप पत्र के साथ संलग्न दस्तावेजों की सूची में जांच रिपोर्ट (प्रारंभिक रिपोर्ट) का हवाला दें, क्योंकि वे गोपनीय हैं।
  • 'सार्वजनिक हित' में आरोपी अधिकारी द्वारा 'विशेषाधिकार' का दावा करने पर भी जांच रिपोर्ट की कॉपी न दे।
  • विभागीय जांच के पूरा होने में छह महीनों से अधिक देरी न करें। अगर कंपनी में किसी कारण वश जांच अधिकारी (आईओ) उपलब्ध नहीं है, तो अनुशासनात्मक प्राधिकरण (डीए) मुख्य सतर्कता आयोग से मंजूरी लेकर सेवानिवृत्त ईमानदार अधिकारियों में से एक जांच अधिकारी (आईओ) की नियुक्त कर सकता है।