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मुख्य सतर्कता अधिकारी के कार्य

भ्रष्टाचार का पता लगाना और सजा निश्चित करना अन्य कार्यों से महत्वपूर्ण हैं, पर भ्रष्टाचार के पहले चरण में दोषी के लिए निवारक उपाय उससे ज्यादा महत्वपूर्ण है। इसलिए, मुख्य सतर्कता अधिकारी की भूमिका और कार्य को मोटे तौर पर दो भागों में विभाजित किया गया है: -

निवारक

निवारक के रुप में मुख्य सतर्कता अधिकारी के निम्नलिखित कार्य है:-

  • भ्रष्टाचार या कदाचार की गुंजाइश को कम करने के लिए संगठन की प्रक्रियाओं और मौजूदा नियमों की विस्तार से जांच करना।
  • संगठन में संवेदनशील/भ्रष्टाचार की पहचान करना और इस तरह के क्षेत्र में तैनात कर्मियों पर नजर रखना।
  • योजना,प्रणालियों,विफलताओं और भ्रष्टाचार का पता लगाना और आकस्मिक निरीक्षण और नियमित रूप से निरीक्षण करना।
  • संदिग्ध अधिकारियों पर उचित निगरानी बनाए रखना।
  • आचरण नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों जैसे-
  • वार्षिक संपत्ति रिटर्न
  • अधिकारी द्वारा स्वीकार किए गए उपहार
  • बेनामी लेनदेन पर नजर रखना।
  • निजी कंपनियों में कार्यरत रिश्तेदारों या निजी कारोबार आदि के बारे में नजर रखना।

दंडात्मक
दंडात्मक उपायों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • केंद्रीय सतर्कता आयोग के मामलों में सभी चरणों में शीघ्र प्रसंस्करण सुनिश्चित करना। मामले में जब मुख्य सतर्कता अधिकारी संदेह में हो तो मुख्य प्रशासनिक जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के मामले में मंत्रालयों / विभागों और मुख्य कार्यकारी के मामले में सचिव द्वारा निर्णय लिया जाएगा।
  • आरोप-पत्र, बयान, गवाह और दस्तावेजों आदि की सूची सुनिश्चित करना, सावधानी से तैयार किये गये सभी दस्तावेजों की प्रतियां गवाहों के बयान, आरोप पत्र के साथ अनुशासनिक प्राधिकारी की ओर से अभियुक्त अधिकारी को भेजी जाती हैं।
  • पूछताछ अधिकारी के पास सभी आवश्यक दस्तावेजों को सुनिश्चित करने के लिए तुरंत भेजा जाता है।
  • पूछताछ अधिकारी की नियुक्ति में देरी न हो यह सुनिश्चित करना और अभियुक्त अधिकारी या पेश अधिकारी द्वारा कोई टालमटोल न किया जा रहा हो।
  • अनुशासनिक प्राधिकारी के आदेश जांच अधिकारी की रिपोर्ट का प्रसंस्करण ठीक और जल्दी से सुनिश्चित करना।
  • समीक्षा के लिए मामला बाहर भेज दिया गया है या नहीं यह देखने के साथ मंत्रालय / विभाग के अनुशासनिक प्राधिकारी अधीनस्थ द्वारा पारित अंतिम आदेश की जांच करना।
  • मंत्रालय / विभाग के अनुशासनिक प्राधिकारी अधीनस्थ द्वारा पारित आदेश की जांच करना और मामले की समीक्षा करना।
  • केंद्रीय जांच ब्यूरो को मामलों की जांच में दी गई सहायता या जानकारी पर जांच स्वयं के स्रोत द्वारा प्रारंभ किया गया है कि नहीं देखना।
  • अभियुक्त अधिकारियों की ओर से दायर याचिकाओं रिट के संबंध में उचित और पर्याप्त कार्रवाई करना।
  • केंद्रीय सतर्कता आयोग द्वारा जहाँ तक संभव है सभी स्तरों पर विचार-विमर्श परामर्श करना और यह सुनिश्चित करना की विभिन्न चरणों के लिए सतर्कता मैनुअल में निर्धारित समय सीमा का पालन हो।
  • आयोग रिटर्न की शीघ्र प्रस्तुति सुनिश्चित करना।
  • अधीनस्थ कार्यालयों के मंत्रालय / विभाग में सतर्कता कार्य का शीघ्र और प्रभावी निपटान सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा व्यवस्था की समय-समय पर समीक्षा करना।
  • यह सुनिश्चित करना की अनुशासनात्मक अधिकारियों द्वारा सतर्कता मामलों के प्रसंस्करण में टालमटोल या नकारात्मक रवैया, जानबूझकर या रिटायर होने की वजह से अधिकारियों के मामलों में, सरकारी कर्मचारियों की मदद तो नहीं की जा रही है।
  • यह सुनिश्चित करना की सेवानिवृत्ति होने वाले लोक सेवकों के खिलाफ मामलों में फाइलों के गुम जैसे कारणों से समय-सीमा में बदलाव न हो, और सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों के मामलों में पारित आदेशों को समय पर लागू किया जा सके।
  • यह सुनिश्चित करना की अनुशासनात्मक मामलों में आरोप पत्र की रिपोर्ट जांच अधिकारी को प्रस्तुत करने में सेवा समाप्त होने की अवधि, आमतौर पर छह महीने से अधिक नहीं होना चाहिए।
  • संयुक्त सचिव एवं मुख्य सतर्कता अधिकारी, केंद्रीय सतर्कता आयोग और केंद्रीय जांच ब्यूरो के साथ उच्च स्तरीय बैठक आयोजित करते है।
  • प्रमुखों/मुख्य सतर्कता अधिकारियों के साथ विभाग के नियंत्रण के अधीन सतर्कता पर्यावरण पर चर्चा और सतर्कता से संबंधित समस्याओं के लिए उपचारात्मक उपायों पर चर्चा के लिए बैठके होती है।