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भारत सरकार Ministry of Electronics & Information Technology
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सामान्‍य सेवा केंद्र

सीएससी व्‍यापक पैमाने पर ई-शासन लागू करने के लिए राष्‍ट्रीय सामान्‍य न्‍यूनतम कार्यक्रम में अपनी प्रतिबद्धता के भाग के रूप में मई 2006 में सरकार द्वारा अनुमोदित राष्‍ट्रीय ई-शासन योजना (एनईजीपी) का एक प्रमुख रणनीतिक अंग है।

सीएससी ई-शासन, शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य, दूर चिकित्‍सा, मनोरंजन के साथ-साथ अन्‍य निजी सेवाओं के क्षेत्र में उच्‍च गुणवत्‍ता युक्‍त तथा लागत प्रभावी वीडियो, वॉइस और डेटा सूचना सामग्री तथा सेवाएं प्रदान करेंगे। सीएससी की एक प्रमुख विशेषता यह है कि ये ग्रामीण क्षेत्रों में वेब समर्थ सेवाएं प्रदान करेंगे, जिनमें आवेदन फार्म, प्रमाणपत्र और उपयोगी कंपनियों जैसे बिजली, टेलीफोन और पानी के बिलों का भुगतान शामिल हैं। बहुत सी जी2सी सेवाओं के अलावा सीएससी दिशानिर्देशों में विविध प्रकार की सूचना सामग्री और सेवाओं की परिकल्‍पना की गई है, जो सीएससी के जरिए प्रदान किए जाने का प्रस्‍ताव है। इनकी सूची नीचे दी गई है:

  • कृषि सेवाएं (कृषि, बागवानी, रेशम कीटपालन, पशुपालन, मत्‍स्‍यपालन, पशु चिकित्‍सा)
  • शिक्षा और प्रशिक्षण सेवाएं (विद्यालय, महाविद्यालय, व्‍यवसायिक शिक्षा, रोजगार आदि)
  • स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं (दूरचिकित्‍सा, स्‍वास्‍थ्‍य जांच, औषधियां)
  • ग्रामीण बैंकिंग और बीमा सेवाएं (माइक्रो-क्रेडिट, ऋण, बीमा)
  • मनोरंजन सेवाएं (फिल्‍म, टेलीविजन)
  • उपयोगिता सेवाएं (बिल भुगतान, ऑनलाइन बुकिंग)
  • वाणिज्यिक सेवाएं (डीटीपी, प्रिंटिंग, इंटरनेट ब्राउसिंग, ग्राम स्‍तरीय बीपीओ)

इस योजना के अंतर्गत निजी क्षेत्र और एनजीओ के लिए भी अनुकूल वातावरण तैयार किया जाता है, ताकि वे सीएससी योजना के कार्यान्‍वयन में अपनी सक्रिय भूमिका अदा कर सकें। इस प्रकार वे ग्रामीण भारत के विकास में सरकार के एक भागीदार के रूप में कार्य कर सकते हैं। सीएससी योजना के पीपीपी मॉडल में त्रिस्‍तरीय ढांचे की परिकल्‍पना की गई है, जिसमें सीएससी प्रचालक (जिन्‍हें ग्राम स्‍तरीय उद्यमी अथवा वीएलई कहा जाता है); सेवा केंद्र एजेंसी (एससीए) जो 500-1000 सीएससी के एक प्रभाग के लिए जिम्‍मेदार होगी; और एक राज्‍य नामित एजेंसी (एसडीए), जिसकी पहचान पूरे राज्‍य में कार्यान्‍वयन के प्रबंधन हेतु जिम्‍मेदार एजेंसी के रूप में राज्‍य सरकार द्वारा की जाएगी, शामि होंगे।

सीएससी ऑनलाइन निगरानी टूल

चार महत्‍वपूर्ण अनुप्रयोग विकसित किए गए और वर्तमान में इनका कार्यान्‍वयन किया जा रहा है तथा ये सीएससी निगरानी समाधान के भाग के रूप में कार्यरत हैं । इनके विवरण निम्‍नानुसार हैं:

  • सीएससी स्‍मार्ट समाधान :  यह अनुप्रयोग ब्‍लॉक स्‍तर पर सीएससी के कार्यान्‍वयन से लेकर सीएससी की अंतिम रूप से स्‍थापना तक की प्रगति का पता लगाता है। यह अनुप्रयोग अलग-अलग चरणों जैसे एससीए का चयन, सीएससी के स्‍थान का चयन, वीएलई की पहचान, आईटी अवसंरचना की स्‍थापना, इंटरनेट कनेक्टिविटी, सीएससी की स्‍थापना, अंतिम अधिप्रमाणन का भी पता लगाता है। यह प्रणाली विभिन्‍न सीएससी में बीएसएनकी कनेक्टिविटी की स्थिति का भी पता लगाती है और सीएससी के उपयोगी निष्‍पादन के संबंध में सूचना प्रदान करती है। http://www.csc.gov.in
  • सीएससी ऑनलाइन निगरानी समाधान : सीएससी की स्‍थापना के पश्‍चात ऑनलाइन निगरानी टूल सीएससी आईटी टर्मिनल के पंजीकरण में सहायता करता है तथा आईटी टर्मिनलों के अपटाइम का पता लगाता है। प्रत्‍येक सीएससी पीसी में ऑनलाइन निगरानी टूल इंस्‍टाल और रजिस्‍टर करना आवश्‍यक है। ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया इस बात के साक्ष्‍य के रूप में कार्य करती है कि सीएससी आईटी टर्मिनल उपलब्‍ध हैं, क्‍योंकि उनका वैधीकरण यूनिक मशीन आईडी (मैक आईडी) तथा डिजीटल सेवाएं प्रदान करने के लिए इंटरनेट की उपलब्‍धता द्वारा किया जाता है।
  • सीएससी ऑनलाइन डैशबोर्ड : यह टूल अखिल भारतीय आधार पर सीएससी के रजिस्‍ट्रेशन और अपटाइम स्थिति पर कार्यपालक एमआईएस प्रदान करता है तथा ऑनलाइन निगरानी टूल द्वारा तैयार तथा प्रेषित किए गए अपटाइम लॉग के आधार पर सीएससी, एससीए और राज्‍यों के निष्‍पादन का पता लगाता है।
  • सीएससी कनेक्‍ट :  सीएससी कनेक्‍ट विभिन्‍न सेवा अभिगम प्रदाता (एसएपी) पोर्टलों के लिए उपलब्‍ध एक ऐसी सुविधा है जो सीएससी ऑनलाइन निगरानी प्रणाली के अंतर्गत परिभाषित उनके अद्वितीय सीएससी आईडी/पासवर्ड मिश्रण का इस्‍तेमाल कर अपने पोर्टलों में सीएससी को लॉगइन की अनुमति प्रदान करता है। यह सुविधा सीएससी को बहुत से एसएपी के साथ उनके आईडी और पासवर्ड याद करने तथा प्रोफाइलों के पंजीकरण की परेशानी से बचाती है। सीएससी कनेक्‍ट सुविधा सीएससी के लिए अपने अद्वितीय सीएससी आईडी/पासवर्ड का इस्‍तेमाल संभव बनाएगी ताकि वे एसएपी पोर्टल का अभिगम कर सकेंगे साथ ही यह विभिन्‍न सीएससी में बहुत से एसएपी साइटों के सेवाओं के इस्‍तेमाल का मापन करने में डीईआईटीवाई की भी सहायता करेगी। 

यह समाधान वर्तमान में निम्‍नलिखित परियोजनों के लिए इस्‍तेमाल किया जाता है:

  • भौगोलिक स्थिति के आधार पर सीएससी को अद्वितीय पहचान प्रदान करता है।
  • सीएससी, वीएलई का उनके पते, ईमेल और संपर्क विवरण के साथ एसक केंद्रीय डेटाबेस रखता है।
  • सीएससी के ऑनलाइन पंजीकरण को समर्थ बनाता है।
  • सीएससी के अपटाइम निष्‍पादन का अनुमान लगाता है, जो दैनिक आधार पर ऑनलाइन पंजीकृत किए गए हैं।
  • किसी सीएससी, एससीए और अपने संगत क्षेत्रों में सीएससी निष्‍पादन पर आधारित राज्‍यों के अपटाइम निष्‍पादन का रिकॉर्ड रखता है।
  • प्राथमिक भौगोलिक इस्‍तेमाल के आधार पर सभी पणधारकों को भूमिका आधारित अधिगम प्रदान करता है।
  • अखिल भारतीय स्‍तर अर्थात राज्‍य-जिला-ब्‍लॉक से लेकर अंतिम सीएससी तक सीएससी का एकल वाटरफॉल परिदृश्‍य प्रदान करता है।
  • प्रत्‍येक सीएससी में बीएसएनएल कनेक्टिविटी की स्थिति की रिकॉर्डिंग को समर्थ बनाता है।

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